मंगल दोष क्या है?
मंगल दोष, जिसे कुज दोष या मंगलिक दोष भी कहते हैं, वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण विचार है। यह तब माना जाता है जब मंगल ग्रह (युद्ध के देवता) किसी व्यक्ति की कुंडली में लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो। परंपरागत मान्यता के अनुसार, मंगल की यह स्थिति विवाह संबंधों में विलंब, कठिनाई या असामंजस्य ला सकती है। मंगल को शक्तिशाली और आक्रामक ग्रह माना जाता है, और इसकी अनुकूल स्थिति न होने पर दाम्पत्य जीवन में तनाव उत्पन्न हो सकता है। हालांकि, यह दोष पूर्ण रूप से अपरिवर्तनीय नहीं है और कई रद्दीकरण (कैंसलेशन) कारक भी होते हैं जो इसके प्रभाव को कम कर सकते हैं।